Posts

Showing posts from June, 2026

मैं कहकर भी नहीं कह पायी....

करोड़ों स्त्रियों को समर्पित जिन्हें लगभग हर रोज यही सब अनुभव होता है अभी अभी बहस हुई फिर एक बार से मुझे कहा गया "तुम तो हो ही ऐसी "... कैसी? मैं कैसी हूं? बेकार! चिड़चिड़ी! हर समय बस नाराज! मैंने भी हंसते हुए कहा "और ये तुम मुझे चिल्लाकर बता रहे हो कि मैं लड़ाई करती हूं " मैं फिर चुप हो गयी  मगर सामने से आरोप लगते रहे बड़बड़ाने में कभी मेरी तो कभी मेरे परिवार के सदस्यों की कमी बतायी जाती रही.... ये पहली बार थोड़े ही है l जब कभी मैं जीवन मे कुछ ऊपर उठने की कोशिश करती हू, हर बार कभी बोलकर तो कभी सीढियों से घसीट कर मुझे नीचे गिराया जाता रहा है l मेरी ख़ामोशियों को पता है तुमने मुझे कब कब गिराने की कोशिश की है । जब कभी मैं जवाब दे भी दू... ऐसा लगता है सामने वाले ने सुना ही नहीं l वो अपनी धुन में मगन मुझे कोसे जा रहा है..... इसलिए आज फिर उसे कुछ समझ नहीं आया कि मैंने क्या कहा? एक बार फिर मैं कहकर भी नहीं कह पायी क्युकी कोई सुनने वाला था ही नहीं..... यह सिर्फ औरत के लिए है एक पक्ष है  कभी कभी स्त्री और पुरुष दोनों बोलते हैं सुनता कोई नहीं।